By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
News To NationNews To NationNews To Nation
  • भारत
    • राष्ट्रीय सुरक्षा
    • देश-समाज
    • राज्य
      • दिल्ली NCR
      • पंजाब
      • यूपी
      • राजस्थान
  • विविध
    • विविध विषय
    • भारत की बात
    • धर्म संस्कृति
    • विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • राजनीति
    • रिपोर्ट
    • कटाक्ष
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड TV ख़बरें
    • वेब स्टोरीज
  • सोशल
    • सोशल ट्रेंड
    • रिपोर्ट
  • बिजनेस
  • अंतरराष्ट्रीय
    • दुनिया
  • हास्य-व्यंग्य-कटाक्ष
    • कटाक्ष
Reading: इस्लामी आक्रांताओं का संहार, कोणार्क चक्र का विज्ञान, सूर्य मंदिर और G20: जानिए इतिहास News To Nation
Share
Notification Show More
News To NationNews To Nation
  • भारत
    • देश-समाज
    • राज्य
  • राजनीति
    • राजनीति
    • रिपोर्ट
    • राष्ट्रीय सुरक्षा
  • मनोरंजन
    • वेब स्टोरीज
    • बॉलीवुड TV ख़बरें
  • विविध
    • विविध विषय
    • धर्म संस्कृति
    • भारत की बात
    • बिजनेस
    • विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • सोशल
Follow US
  • भारत
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • विविध
  • सोशल
© 2023 Saffron Sleuth Media. All Rights Reserved.

Home » इस्लामी आक्रांताओं का संहार, कोणार्क चक्र का विज्ञान, सूर्य मंदिर और G20: जानिए इतिहास News To Nation

भारत की बात

इस्लामी आक्रांताओं का संहार, कोणार्क चक्र का विज्ञान, सूर्य मंदिर और G20: जानिए इतिहास News To Nation

NTN Staff
2 years ago
14 Min Read
Share
SHARE

Contents
  • सूर्य पूजा की पौराणिक कथा, साम्ब और कुष्ठ रोग
  • कोणार्क का सूर्य मंदिर: यूरोपियनों ने कहा – ‘ब्लैक पैगोडा’
  • कोणर्क मंदिर के पहिये/चक्र: क्या है इसका महत्व
  • गंगवंश के नरसिंहदेव, जिन्होंने कोणार्क में बनवाया सूर्य मंदिर

भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित G20 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहाँ सभी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया, वहाँ पीछे ओडिशा में स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर के चक्र की प्रतिमूर्ति बनी हुई थी। इसने सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया। असल में G20 के जरिए मोदी सरकार ने भारत की संस्कृति का भी प्रचार-प्रसार किया और उसके तहत ही ऐसा किया गया था। एक तरह से अब कोणार्क का चक्र, पहिया, अब वैश्विक हो गया है और इसे एक बड़ी पहचान मिली है, सम्मान मिला है।

ऐसे में, आइए हम कोणार्क के सूर्य मंदिर के बारे में जानते हैं। ओडिशा के कोणार्क में स्थित इस मंदिर को पूर्वी गंगवंश के राजा नरसिंहदेव ने 13वीं शताब्दी के मध्य में बनवाया था। इसे इसकी संरचना और कलाकृतियों के लिए जाना जाता है। 19वीं शताब्दी के इतिहासकार जेम्स फ़र्ग्यूशन ने कहा था कि जितने मंदिर शेष भारत में हैं, उससे ज़्यादा अकेले ओडिशा में हैं। कोणार्क के सूर्य मंदिर के ऊपरी हिस्सा अब नहीं है, लेकिन फिर भी इसकी भव्यता कम नहीं हुई है।

Symbolic and historic!

Leaders’ warm greetings with PM @narendramodi feature the Konark Wheel of Odisha, a marvel from the 13th century under King Narasimhadeva-I’s rule. This wheel, with its 24 spokes, also graces India’s national flag, symbolizing the nation’s ancient wisdom,… pic.twitter.com/nWbTAnS64Y

— MyGovIndia (@mygovindia) September 9, 2023

कोणार्क नाम के पीछे भी एक कारण है। जहाँ ‘अर्क’ का अर्थ सूर्य है, वहीं ‘कोण’ का मतलब अंग्रेजी वाला एंगल। यूरोप से आने वाले यात्रियों ने इस मंदिर को ‘काला पैगोडा’ कहा था। एशिया में बड़ी-बड़ी धार्मिक संरचनाओं को ‘पैगोडा’ कहा जाता था। कोणार्क में भव्य मंदिर भले ही बाद में बना हो, इसका महत्व पुराणों में भी वर्णित है। ब्रह्म पुराण में लिखा है कि कोणादित्य (कोणार्क) उत्कल (ओडिशा) में भगवान सूर्य के भक्तों के लिए एक पवित्र स्थल है। एक और कहानी है सूर्य उपासना की, जो भविष्य पुराण और साम्ब पुराण में वर्णित है।

सूर्य पूजा की पौराणिक कथा, साम्ब और कुष्ठ रोग

भगवान श्रीकृष्ण और जाम्बवती का एक बेटा था – साम्ब। भगवान श्रीकृष्ण की पत्नियाँ जब स्नान कर रही थीं, तब नारद जी के कहने पर साम्ब वहाँ पहुँच गया था। इस कारण श्रीकृष्ण ने उसे कुष्ठ रोग से ग्रसित होने का श्राप दिया। साम्ब ने स्वयं के निर्दोष होने की बात साबित की, लेकिन श्राप वापस नहीं लिया जा सकता था। अतः, उसे भगवान सूर्य की आराधना करने को कहा गया। सूर्य को चर्मरोग का हरण करने वाला माना जाता है। आज विज्ञान भी मानता है कि सूर्य के प्रकाश से चमड़े की कई बीमारियों में लाभ हो सकता है।

साम्ब को मित्रवन में चंद्रभागा नदी के तट पर तपस्या करने के लिए कहा गया। 12 वर्षों के बाद सूर्यदेव की कृपा से जब उसकी बीमारी ठीक हुई, तब उसने सूर्य मंदिर बनवाने का निर्णय लिया। हालाँकि, स्थानीय ब्राह्मणों के इनकार के बाद उसने शकद्वीप (ईरान/पर्शिया) से पारसी पुजारियों को लेकर आना पड़ा, जिसे मागी कहते हैं। भगवान सूर्य की तस्वीर में बूट्स देख सकते हैं आप यहाँ, जो मध्य एशियाई निर्माण कला का प्रभाव है। मध्य एशिया से प्रवासी यहाँ पहली शताब्दी में ही आए थे।

साम्ब के तपस्या का जो स्थल है, उसे साम्बपुर के नाम से जाना गया। ये जगह अभी पाकिस्तान में स्थित मुल्तान में है। चंद्रभागा नदी, चेनाब का ही प्राचीन नाम था। वहीं कोणार्क में समुद्र द्वारा बनाया गया एक झील भी है, जिसे ‘चंद्रभागा’ नाम से जाना गया। जगन्नाथपुरी का इतिहास समेटे ओडिशा के प्राचीन ताड़पत्र वाले दस्तावेज ‘मदल पंजी’ में लिखा है कि राजा पुरंदर केसरी ने कोणार्क मंदिर बनवाया। केसरी वंश को हराने वाले गंग वंश ने भी कोणार्क देवता के सामने अपना सिर झुकाया। नरसिंहदेव (1238-64) ने यहाँ भव्य मंदिर बनवाया।

कोणार्क का सूर्य मंदिर: यूरोपियनों ने कहा – ‘ब्लैक पैगोडा’

उनके वंशज भी कोणार्क में पूजा करते रहे। मुकुंदराजा (1569-68) के निधन के बाद यवनों (इस्लामी आक्रांताओं) ने हमला किया और जब वो मंदिर को ध्वस्त करने में सफल नहीं हुए तो ताम्बे के कलश और पद्म-ध्वजा ले गए। गंग राजवंश के ताम्रपत्रों में लिखा है कि नरसिंहदेव ने उषारश्मि (सूर्य) का मंदिर त्रिकोण के कोने में ‘महत (महान) कुटीर’ बनवाया। नरसिंह देव ने अपने बेटे का नाम भी ‘भानु’ रखा था, जो भगवान सूर्य का नाम है। वो भानुदेव कहलाए। बताया जाता है कि इस्लामी आक्रांताओं को हराने के बाद उन्होंने ये भव्य मंदिर बनवाया था।

16वीं शताब्दी तक इस मंदिर की लोकप्रियता कई सीमाओं को पार कर चुकी थी। बंगाल के वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु भी यहाँ पहुँचे थे। वो पुरी भी तीर्थयात्रा के लिए गए थे। अकबर के दरबारी अबुल फज़ल तक ने लिखा है कि कैसे ये इतना भव्य मंदिर है कि जो देखता है वो बस देखता ही रह जाता है। मंदिर का शिखर कैसे गिरा, इस पर अलग-अलग मत हैं। ज्यादातर विद्वानों का मानना है कि इस्लामी आक्रांताओं ने मंदिर को जो नुकसान पहुँचाया था, उस कारण ऐसा हुआ।

जेम्स फ़र्ग्यूशन ने शिखर की ऊँचाई 45.72 मीटर होने का अंदाज़ा लगाया था। मुख्य मंदिर की बात करें तो इसे एक विशाल रथ के रूप में बनवाया गया था, जिसमें 12 चक्के हैं। साथ ही इसमें 7 सजे-धजे घोड़ों को दौड़ते हुए दर्शाया गया है। मंदिर में कई कलाकृतियाँ हैं, जिनमें भगवान सूर्य और अन्य देवी-देवताओं के साथ-साथ नृत्यांगनाओं, पक्षियों और जानवरों तक को दिखाया गया है। शेर, हाथी और घोड़ों की मूर्तियाँ हैं दीवारों में। जिराफ, ऊँट, हिरन, बाघ, सूअर, बन्दर और बैल भी हैं।

कोणर्क मंदिर के पहिये/चक्र: क्या है इसका महत्व

साथ ही नाग और नागकन्याओं को दिखाया गया है, आधा मनुष्य और आधा साँप के रूप में। अब बात करें हैं पहियों, यानी चक्र की। वही चक्र, जिसके सामने G20 नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाथ मिलाया, उनका स्वागत किया, तस्वीरें क्लिक करवाईं। कोणार्क के मंदिर में ये पहिये इतने अच्छे से बनाए गए हैं कि रथ में पहियों को जोड़ने के लिए जिस कील का इस्तेमाल होता था उन्हें भी एकदम सटीक जगह पर लगाया गया है। ये एक विशेष प्रकार की कला है, जो इसे खास बनाता है और इस मंदिर की मुख्य विशेषता है।

इस पहिये की पतली वाली तीलियों में 30 दाने (मनके) बने हुए हैं। साथ ही कमल के फूल की पत्तियाँ बनी हुई हैं। वहीं कुछ पहियों में नृत्य करती हुई आकृतियों को एकदम साम्य में दिखाया गया है। इसके केंद्र में कई कन्याओं की आकृतियाँ हैं, कुछ अन्य आकृतियाँ भी हैं। शिव-पार्वती, बाँसुरी बजाते श्रीकृष्ण, और हाथी पर बैठे एक राजा की भी मूर्ति है जिसके सामने एक समूह खड़ा है। आज यही चक्र भारत की शान बन कर दुनिया के सामने हमारे वैभव और हमारे समृद्ध इतिहास का प्रदर्शन कर रहा है।

इन पहियों का बड़ा महत्व है। इस चक्र में 8 बाहरी और 8 भीतरी तीलियाँ हैं। 12 जोड़े पहिये साल के 12 महीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही 8 तीलियाँ दिन के 8 पहर को दिखाती हैं। सूर्य की स्थिति के हिसाब से समय बताने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता था। इसे ऐसे तैयार किया गया था कि सूर्य का प्रकाश भी इससे पास हो और जो छाया बनती थी, उसका इस्तेमाल समय देखने के रूप में किया जाता था। पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा की गतियों को ध्यान में रखते हुए इसे बनाया गया था, एक ‘Sundial’ के रूप में।

कई धार्मिक समारोहों के लिए भी समय की गणना इसका इस्तेमाल कर के की जाती थी। इन पहियों का डायमीटर 9 फ़ीट 9 इंच है। भारत के करेंसी नोट्स पर भी आप कोणार्क के इस चक्र को देख सकते हैं। इसकी 24 तीलियाँ दिन-रात के 24 घंटों को दर्शाते हैं। यानी, खगोलीय और वैज्ञानिक गणनाओं को ध्यान में रखा गया था इस पहिये के निर्माण के समय। ऐसा नहीं कि सिर्फ मूर्तिकारों ने इसे बना दिया। विद्वानों की देखरेख में सारा काम किया गया था। इस पहिये में पूरी प्रकृति है – पशु-पक्षी, नदी-पहाड़, देवी-देवता।

अब आप सोच रहे होंगे कि पहिये की परछाई से समय कैसे पता चलेगा? इसके लिए पहियों के बीच में ऊँगली रखी जाती है और उसकी छाया से समय पता चलता है। 12 पहिये 12 राशियों को भी दिखाते हैं। इसे कानून का पहिया भी कहा जाता है। ये जीवन चक्र के लगातार चलायमान होने को भी दर्शाता है। पतली वाली तीलियाँ डेढ़ घंटे (90 मिनट) के समय को बताती हैं। ये कुछ वैसा ही है, जैसे आजकल हम घड़ी देखते हैं। ये अध्यात्म ही नहीं, बल्कि उसके साथ-साथ विज्ञान का भी मिश्रण है।

गंगवंश के नरसिंहदेव, जिन्होंने कोणार्क में बनवाया सूर्य मंदिर

नरसिंहदेव को नरसिंह-I भी कहा जाता है। उनके बारे में जिक्र मिलता है कि उनका विजय अभियान दक्षिण भारत तक फैला हुआ था। आंध्र प्रदेश के द्राक्षाश्रम में एक शिलालेख में उन्हें गोदावरी का राजा कहा गया है। ‘मदल पंजी’ में यहाँ तक लिखा है कि उन्होंने 12 वर्ष दक्षिण भारत में गुजारे और रामेश्वरम के सेतुबंध तक पहुँचे। उन्होंने जब गद्दी संभाली थी, तो ओडिशा एक तरफ बंगाल के मुस्लिम शासकों और दूसरी तरफ पूर्वी डेक्कन के काकतीया वंश से लड़ाई में जूझ रहा था।

उनके पिता अनंगभीम-III ने भी गंगवंश की सीमाओं को मुस्लिम आक्रांताओं से बचाने के लिए तैयारियाँ की थीं। हालाँकि, नरसिंहदेव ने इस मामले में आक्रामक नीति अपनाई। सन् 1243 में ओडिशा के सैनिकों ने लक्ष्मणावती (अब का मालदा जिला) में घुस कर मामलुक मुस्लिम शासकों को मजा चखाया। कटासिन में भयंकर लड़ाई हुई, जहाँ जहाँ बड़ी संख्या में इस्लामी आक्रांताओं का संहार किया गया। बंगाल के शासक इज्जुद्दीन तुगरिल तुगान खाँ को वहाँ से भागना पड़ा।

सन् 1245 में नरसिंहदेव की सेना फिर से लक्ष्मणावती पहुँची। तुगान खाँ की राजधानी को घेर लिया गया और उसे दिल्ली और अवध से सहायता के लिए गुहार लगानी पड़ी। जब तक मदद के लिए फ़ौज आती, ओडिशा की सेना मॉनसून के महीने में वापस लौट चुकी थी। इस युद्ध का नायक सेनापति सबंतोर (सामंतराय) को माना जाता है। इसके बाद इख़्तियाउद्दीन उज़बक बंगाल का शासक बनाया गया और वो इस हार का बदला लेना चाहता था। जाजनगर के राय के दामाद सामंतराय ने उसे भी हराया।

गंगवंश के ताम्रपत्र में लिखा है कि इस युद्ध में ओडिशा की ऐसी जीत हुई थी कि गंगा नदी का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम महिलाओं के रोने के कारण उनके आँसुओं के साथ कहने वाले काजल से लाल हो गया था। इस्लामी आक्रांताओं से बचा कर राधा और गौड़ परंपरा के संन्यासियों को भी भुवनेश्वर में जगह दी गई। हावड़ा, हुगली और मेदिनीपुर जैसे बंगाली इलाके नरसिंहदेव के साम्राज्य का हिस्सा बन गए थे। इन्हीं विजय अभियानों ने उन्हें कोणार्क में भव्य मंदिर बनवाने के लिए प्रेरित किया।

नरसिंहदेव ने कई मंदिर बनवाए। उन्होंने बालासोर के रमुना में गोपीनाथ मंदिर बनवाया। उन्होंने कपिलास में महादेव के मंदिर बनवाया। सिम्हाचलम के नरसिंह मंदिर में उन्होंने कई निर्माण कार्य करवाए। सिवाई संतरा को कोणार्क में मंदिर बनवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बताया जाता है कि जब वो परेशान थे तब एक बूढ़ी महिला ने उन्हें बताया था कि मंदिर बनवाने के लिए नदी के बीच में पत्थर फेंकने से कुछ नहीं होगा, किनारे से निर्माण कार्य शुरू करवाना पड़ेगा।


Source

Copy
फ़ौज ने किया 400 हिन्दुओं का नरसंहार तो खुश हुए नेहरू, गाँधी ने पूरे बिहार को कहा ‘पापी’: 1946 दंगे News To Nation
ओडिशा के सूर्यवंशी गजपति राजा, जिन्होंने तेलंगाना तक इस्लामी शासन को उखाड़ फेंका था News To Nation
‘नौजवानों से नहीं कह सकते कि वे बम-पिस्तौल उठाएँ… राष्ट्र सेवा, राष्ट्रीय त्याग ही सर्व-महत्वपूर्ण’ News To Nation
जब अमेरिका के कई होटलों में स्वामी विवेकानंद को नीग्रो समझ अंदर जाने से रोका गया News To Nation
जब नेहरू ने पेरियार को कहा ‘पागल’ और ‘विकृत दिमाग वाला व्यक्ति’ News To Nation
Share This Article
Facebook Email Print
Previous Article उदयनिधि स्टालिन के सनातन विरोधी बयान पर घिरी I.N.D.I.A.: बीजेपी ने राहुल गाँधी की चुप्पी पर उठाए सवाल, कहा- वोट बैंक के लिए हिंदू धर्म का कर रहे विरोध
Next Article जब अमेरिका के कई होटलों में स्वामी विवेकानंद को नीग्रो समझ अंदर जाने से रोका गया News To Nation
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

News To Nation

Latest Stories

अभी अभी: शौक में डूबा देश, वरिष्ठ भाजपा नेता का निधन
भारत
LPG Gas Cylinder Price Update: अब एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत कितनी होगी? जानें पूरी जानकारी…
भारत
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बंद रहेंगे बैंक? जाने कहा-कहा छुट्टी
राजनीति
लॉन्च किया Mother Dairy ने नया दूध, जाने क्या है कीमत और कब शुरू होगी बिक्री…
बिजनेस
पर्सनल लोन लेने वालों के लिए आई बड़ी खबर, RBI ने जारी किया नया नियम
बिजनेस
इस बजट में मिलेगा EV को फायदा, इन चीजों पर होगा फोकस
बिजनेस
आज सस्ता हुआ सोना-चांदी? जाने क्या हो गया अब भाव
बिजनेस
IND VS AFG तीसरा T20 हुआ बड़ा दिलचस्प, सुपर ओवर से निकला रिजल्ट….
विविध

You Might Also Like

कस्तूरबा को गाँधी ने ‘पेनिसिलिन’ भी नहीं लेने दिया, हो गई मृत्यु: खुद कराई सर्जरी News To Nation

By NTN Staff
भारत की बात

जब साथियों को बचाने के लिए भगत सिंह ने लगाया दिमाग, मेले में क्रांतिकारी News To Nation

By NTN Staff
भारत की बात

माँ सरस्वती के पुत्र, जो कलम से जगा रहे थे आज़ादी की अलख: जानें उन कवियों को News To Nation

By NTN Staff
भारत की बात

वंदे मातरम में देवी दुर्गा की स्तुति… मुस्लिमों ने किया विरोध तो नेहरू ने चला दी थी कैंची News To Nation

By NTN Staff
भारत की बात
NewstoNation.com is a leading digital news media platform, established in 2016, dedicated to delivering credible, fast, and people-centric journalism in the digital era. From breaking news and current affairs to automobile, technology, entertainment, and lifestyle, we bring stories that inform, inspire, and influence.
NewstoNation.com is a leading digital news media platform, established in 2016, dedicated to delivering credible, fast, and people-centric journalism in the digital era. From breaking news and current affairs to automobile, technology, entertainment, and lifestyle, we bring stories that inform, inspire, and influence.

contact@newstonation.com

Policies

  • हमारे बारे में
  • सारी हिन्दी ख़बरें
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
Follow US
© Saffron Sleuth Media .All Rights Reserved.
  • हमारे बारे में
  • सारी हिन्दी ख़बरें
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?